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विधायक अम्लान भादुड़ी होंगे विधानसभा में मुख्य सचेतक
कोलकाता। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई सरकार के पहले बजट सत्र से ठीक पहले भाजपा विधायक दल ने विधानसभा में अपने मुख्य सचेतक के नाम पर मुहर लगा दी है। राजनीतिक गलियारों को चौंकाते हुए इस महत्वपूर्ण पद के लिए इंग्लिशबाजार से पहली बार विधानसभा पहुंचे युवा विधायक अम्लान भादुड़ी को चुना गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विधायक दल के इस फैसले के बाद अम्लान भादुड़ी के नाम की फाइल औपचारिक मंजूरी के लिए नवान्न भेज दी गई है, जहां से हरी झंडी मिलते ही वह आधिकारिक तौर पर अपना कार्यभार संभाल लेंगे। प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में यह कयास लगाए जा रहे थे कि इस बेहद जिम्मेदारी भरे पद के लिए किसी वरिष्ठ और अनुभवी चेहरे को आगे लाया जाएगा, लेकिन भाजपा नेतृत्व ने नई पीढ़ी के चेहरे पर दांव खेलकर सबको हैरान कर दिया है।
इस फैसले के पीछे भाजपा की उत्तर बंगाल को साधने और क्षेत्रीय संतुलन बनाने की एक बड़ी रणनीति साफ दिखाई दे रही है। राज्य में हुए हालिया सत्ता परिवर्तन में उत्तर बंगाल ने बेहद निर्णायक भूमिका निभाई है, यही वजह है कि सरकार और संगठन दोनों में ही इस क्षेत्र को विशेष तवज्जो दी जा रही है। इससे पहले कोचबिहार दक्षिण के विधायक रथींद्र बोस को विधानसभा अध्यक्ष जैसी गरिमामयी कुर्सी सौंपी जा चुकी है, वहीं उत्तर बंगाल के कई अन्य चेहरों को मंत्रिमंडल में भी अहम विभागों की कमान मिली है।
कैबिनेट के गठन में माथाभांगा के विधायक निशीथ प्रमाणिक को उत्तर बंगाल विकास विभाग और तुफानगंज की विधायक मालती रावा राय को महिला एवं बाल कल्याण विभाग जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। इसी तरह फालाकाटा के विधायक दीपक बर्मन को स्कूल शिक्षा विभाग, माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी के विधायक आनंदमय बर्मन को परिवहन एवं वित्त विभाग में राज्य मंत्री तथा हबीबपुर के विधायक जुएल मुर्मू को पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में राज्य मंत्री पद से नवाजा गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मालदा जिले की 12 विधानसभा सीटों में से भाजपा ने इस बार शानदार प्रदर्शन करते हुए 6 सीटों पर कब्जा जमाया था, लेकिन इसके बावजूद कैबिनेट में जिले को वह प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया था जिसकी उम्मीद थी। ऐसे में अम्लान भादुड़ी को मुख्य सचेतक बनाकर पार्टी ने मालदा के असंतोष को दूर करने और एक सटीक क्षेत्रीय संतुलन साधने का प्रयास किया है।
संसदीय लोकतंत्र और विधानसभा की कार्यवाही के सुचारू संचालन में मुख्य सचेतक का पद बेहद रसूखदार और संवेदनशील माना जाता है। सत्र के दौरान सदन के भीतर किस विधायक को किस मुद्दे पर कितना समय आवंटित किया जाएगा, विभिन्न विधेयकों और बहसों पर पार्टी की अंदरूनी रणनीति क्या होगी और प्रश्नोत्तर काल के दौरान मंत्रियों की सक्रिय भागीदारी कैसे सुनिश्चित की जाएगी, इन तमाम फैसलों की धुरी मुख्य सचेतक ही होते हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री और मंत्रियों के वक्तव्य के समय का निर्धारण करने में भी उनके कार्यालय की केंद्रीय भूमिका होती है।
यदि संसदीय इतिहास पर नजर डालें तो पिछली तृणमूल सरकार के शुरुआती पांच वर्षों में इस जिम्मेदारी को शोभनदेव चट्टोपाध्याय जैसे कद्दावर नेता ने संभाला था, जबकि बाद के सालों में यह दायित्व निर्मल घोष के पास रहा। वहीं वाममोर्चा के शासनकाल में भी यह परंपरा रही कि केवल बेहद अनुभवी और संसदीय परंपराओं के ज्ञाता विधायकों को ही इस पद पर बिठाया जाता था। ऐसे ऐतिहासिक परिदृश्य के बीच, पहली बार के विधायक अम्लान भादुड़ी को इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपना यह साफ संकेत देता है कि भाजपा अब राज्य में अपने युवा नेतृत्व को फ्रंट सीट पर रखकर आगे बढऩे की तैयारी कर चुकी है।